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डेथ एनिवर्सरी: जब नूतन का हाथ मांगने गए थे राजेंद्र कुमार, मां शोभना समर्थ ने कर दी थी बेइज्जती, शम्मी कपूर से भी टूट गई थी शादी

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2 घंटे पहले

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‘सीमा’, ‘सुजाता’, ‘बंदिनी’, ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी फिल्मों में सशक्त अभिनय से छाप छोड़ने वाली भारतीय सिनेमा की सबसे सौम्य अभिनेत्री नूतन को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। वुमन सेंट्रिक रोल वाली फिल्में उनकी पहचान बनीं। उन्होंने एक्ट्रेसेज के महज शोपीस के तौर पर इस्तेमाल होने की परंपरा को बदला। वे ‘मिस इंडिया’ का खिताब जीतने वाली पहली एक्ट्रेस भी बनीं। सबसे ज्यादा फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड भी लंबे समय तक उनके नाम रहा। 21 फरवरी को उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जानते हैं उनकी लाइफ से जुड़े कुछ फैक्ट्स…

पहली एक्ट्रेस बनीं जिन्होंने जीता ‘मिस इंडिया’ खिताब

नूतन के करियर का आगाज बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस फिल्म ‘नल दमयंती’ से हुआ। इस बीच उन्होंने ‘मिस इंडिया’ में हिस्सा लिया और जीता। इस टाइटल को पाने वालीं वे पहली एक्ट्रेस थीं। घर में फिल्मी माहौल रहने के कारण नूतन अक्सर अपनी मां के साथ शूटिंग देखने जाया करती थीं। इस वजह से उनका भी रुझान फिल्मों की ओर हो गया और वह भी अभिनेत्री बनने के ख्वाब देखने लगीं। 1950 में 14 बरस की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘हमारी बेटी’ की, जिसका निर्माण उनकी मां शोभना समर्थ ने ही किया था। बालिग होने तक नूतन ने ‘हमलोग’, ‘शीशम’, ‘परबत’ और ‘आगोश’ जैसी फिल्में कर डालीं। हालांकि इसके बाद वे लंदन चली गईं और लौटकर आईं तो ‘सीमा’ में विद्रोही नायिका का किरदार निभाकर बेस्ट एक्ट्रेस का पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता।

शादी के बाद भी ऑफर होते रहे हीरो के बराबर या लीड रोल

नूतन का स्टारडम ऐसा था कि जहां ये माना जाता था कि शादी के बाद एक्ट्रेस का करियर डाउन हो जाता है, वहीं नूतन को शादी के बाद भी फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों में कास्ट करने को तैयार रहते थे। उन्हें फिल्म में लेने से पहले वे सुनिश्चित करते थे कि फीमेल लीड की भूमिका सशक्त और हीरो के बराबरी होनी चाहिए। नूतन को पाथ ब्रेकिंग किरदार निभाने के लिए पहचाना गया। नूतन ने परदे पर साड़ी में लिपटी शांत, सरल और सुलझी हुई महिला का किरदार भी निभाया और स्क्रिप्ट की डिमांड पर बोल्ड कपड़ों में भी नजर आईं। शबाना और स्मिता पाटिल जैसी एक्ट्रेसेज भी उनसे इंस्पायर हुई। आज दिग्गज निर्देशक माने जाने वाले संजय लीला भंसाली ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने नूतन की तरह सहज और करिश्माई एक्ट्रेस नहीं देखी। वह चाहकर भी किसी से नूतन जैसी एक्टिंग नहीं करवा सकते।

प्रेग्नेंसी में किया काम, करियर की बेस्ट फिल्म बनी ‘बंदिनी’

नूतन ने अपने करियर में तमाम हिट फिल्में कीं, लेकिन उनकी चॉइस अपने जमाने की एक्ट्रेसेज से जुदा थी। वे अधिकतर वुमन सेंट्रिक फिल्मों का चयन ही करती थीं। यही कारण था कि उन्होंने ‘सीमा’, ‘सुजाता’, ‘बंदिनी’ और ‘सोने की चिड़िया’ जैसी फिल्में कीं। बता दें कि नूतन ने जब फिल्मों से ब्रेक लेने का मन बना लिया था तब बिमल रॉय उनके पास अपनी फिल्म ‘बंदिनी’ का ऑफर लेकर आए। वे खुद भी बिमल दा की फिल्म को हाथ से नहीं जाने देना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने पहले बिमल दा को मना कर दिया। फिर उनके पति रजनीश ने उन्हें कन्विंस किया कि बिमल रॉय की फिल्म है तुम्हें करनी चाहिए। नूतन उन दिनों प्रेग्नेंट थीं फिर भी उन्होंने फिल्म करने के लिए हामी भर दी। फिल्म जब रिलीज हुई तो हर कोई उनके अभिनय का कायल हो गया। ये फिल्म उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्म बन गई।

अपनी ही फिल्म के प्रीमियर में थिएटर के अंदर नहीं घुसने दिया

1951 में फिल्म ‘नगीना’ रिलीज हुई थी जिसमें डरावने सीन भी थे इसलिए नाबालिगों के लिए फिल्म देखने की मनाही थी। नूतन की उम्र उस वक्त महज 15 साल थी। वे अपने अपने फैमिली फ्रेंड शम्मी कपूर के साथ फिल्म के प्रीमियर पर पहुंची। उन्हें लग रहा था कि वे फिल्म की हीरोइन हैं तो उनका जोरदार स्वागत होगा, लेकिन हुआ इसका उलटा। वॉचमैन ने थिएटर के गेट पर ही नूतन को रोक दिया। काफी बहस के बाद भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।

अफेयर की खबरों से बौखलाकर संजीव कुमार को मारा थप्पड़

नूतन और संजीव कुमार से जुड़ा एक किस्सा मशहूर है कि 1969 में ‘देवी’ की शूटिंग के दौरान नूतन ने संजीव को सरेआम थप्पड़ मार दिया था। दरअसल, शुरुआत में नूतन और संजीव एक-दूसरे से ज्यादा बात नहीं करते थे, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हो गई। दोनों की जबरदस्त ट्यूनिंग चर्चा का विषय बन गई जिसे लोगों ने अफेयर का नाम दे दिया। नूतन का पति से इस बात पर झगड़ा होने लगा। नूतन ने ‘देवी’ के सेट पर ही एक मैगजीन पढ़ी, जिसमें उनके और संजीव के अफेयर के बारे में छपा था। वे काफी गुस्सा हुईं और सेट पर ही संजीव को थप्पड़ जड़ दिया। कई लोगों का कहना है कि ऐसा उन्होंने पति के कहने पर किया।

नूतन के दीवाने थे राजेंद्र कुमार और शम्मी कपूर

नूतन को राजेंद्र कुमार बहुत पसंद करते थे। उन्होंने नूतन की मां से उनका हाथ तक मांगा, लेकिन शोभना समर्थ ने इस रिश्ते से इंकार कर दिया और राजेंद्र कुमार की खूब बेइज्जती भी की। खैर रियल लाइफ में तो ये रिश्ता नहीं जुड़ पाया मगर रील लाइफ में 1978 में फिल्म ‘साजन बिना सुहागन’ में दोनों को पति-पत्नी का किरदार निभाने का मौका मिल गया।

वहीं शम्मी कपूर भी नूतन के दीवाने हो गए थे। हालांकि दोनों बचपन से ही एक-दूसरे को जानते थे। बड़े हुए तो डेटिंग भी करने लगे। वे एक-दूसरे से शादी के लिए राजी थे। नूतन की मां शोभना को इस रिश्ते पर कोई ऐतराज नहीं था, लेकिन समर्थ परिवार के नजदीकी प्रसिद्ध अभिनेता मोतीलाल इस रिश्ते के हक में नहीं थे। उन्होंने दोनों का रिश्ता नहीं होने दिया।

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